
आशा भोसले : दस वर्ष की उम्र में रिकार्ड किया पहला गीत
आशा भोसले ने पिता के निधन के बाद मात्र 10 वर्ष की उम्र में अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया। 1943 में उन्होंने ने फिल्म 'माझा बाल' के लिए मराठी गीत रिकार्ड किया था।

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आशा भोसले ने शोख गीतों से लेकर उदासी भरे नगमों तक और पॉप से लेकर गजलों तक, हर विधा के संगीत को अपने सुरों से अमर किया। दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार को 92 वर्ष उम्र में निधन हो गया। आशा भोसले ने अपनी बहन एवं महान गायिका लता मंगेशकर की छाया में रहकर अपनी अलग पहचान बनाई थी। दोनों बहनों ने मिलकर करीब सात दशक तक हिंदी पार्श्वगायन को अपने सुरों से समृद्ध किया और एक ऐसे भारत की पहचान बनीं, जो बदलते समय के साथ दुनिया से कदमताल कर रहा था।
बहुरंगी आवाज की धनी थीं आशा भोसले
आशा भोसले बहुरंगी आवाज की धनी थीं। उन्होंने एक ओर जहा सुनने वालों को 'आजा, आजा...' जैसे जोशीले गीत पर थिरकने को मजबूर किया, वहीं 'जुस्तजू जिसकी थी...' जैसे शास्त्रीय विधा वाले गीतों के साथ उन्हें भावनाओं की गहराई में उतारा। उन्होंने मीना कुमारी और मधुबाला से लेकर काजोल और उर्मिला मातोंडकर तक परदे की नायिकाओं के लिए गीत गाए। आशा भोसले ने 12 हजार से अधिक गीत गाए, जिनमें से ज्यादातर हिंदी में थे, लेकिन उन्होंने इसके अलावा लगभग 20 अन्य भाषाओं में भी गीतों को आवाज दी। यह एक ऐसा विराट सफर है, जिसे एक साथ समेट पाना आसान नहीं। आशा और उनके भाई-बहनों- लता, उषा, मीना और हृदयनाथ के लिए संगीत केवल पेशा नहीं, शायद नियति भी था। जहां लता और उषा गायिका थीं, वहीं मीना और हृदयनाथ संगीतकार हैं।
1933 में दीनानाथ के घर हुआ जन्म
आशा भोसले का जन्म वर्ष 1933 में दीनानाथ मंगेशकर के घर हुआ। दीनानाथ मंगेशकर ने अपने अन्य बच्चों की तरह शास्त्रीय संगीत की शिक्षा आशा भोसले को भी दी। उन्होंने अपने पिता के निधन के बाद मात्र 10 वर्ष की उम्र में अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया। यह 1943 में फिल्म 'माझा बाल' के लिए गाया मराठी गीत 'चला चला नव बाला' था। 1948 में 'चुनरिया' के लिए 'सावन आया गीत गाया। आशा भोसले को बड़ी सफलता 1950 के दशक में मिली। उन्हें खासकर संगीतकार ओपी नैयर के साथ उनके जोशीले और चुलबुले गीतों ने नयी पहचान दी। उस समय पार्श्वगायन पर शास्त्रीय शुद्धता की ज्यादा छाप थी, लेकिन आशा ने उसमें अदा, शोखी और आधुनिकता का रंग भरा। वह क्लब गीतों, कैबरे गीतों और प्रेम गीतों की आवाज बन गईं। ये ऐसे क्षेत्र थे, जिन्हें अपनाने में अन्य गायक संकोच करते थे। उनके करियर का अगला मोड़ तब आया जब 1960 और 1970 के दशक में आरडी बर्मन के साथ उनकी साझेदारी ने हिंदी फिल्म संगीत को नयी दिशा दी। 'पिया तू अब तो आजा..., दम मारो दम... जैसे गीतों ने उनकी बेजोड़ बहुमुखी प्रतिभा को सामने रखा। उनकी एक गजल दिल चीज क्या है...ने तहलका मचा दिया था। आशा ने 1949 में केवल 16 वर्ष की आयु में अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध गणपतराव भोसले से विवाह किया। यह विवाह सफल नहीं रहा, लेकिन गणपतराव ने आशा को गायिका बनने के लिए प्रेरित किया। जब यह रिश्ता समाप्त हुआ, तब आशा के दो बच्चे थे और वह अपने तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। इसके बाद वह अपने मायके लौट आईं और उन्होंने अपने संगीत सफर को फिर से आगे बढ़ाया। शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादातर खलनायिकाओं और नर्तकियों के लिए गीत मिलते थे। कभी-कभी उन्हें कुछ लोकप्रिय फिल्मों में एक-दो गीत गाने का मौका मिलता, जैसे राज कपूर की 'बूट पॉलिश' में उनका लोकप्रिय गीत 'नन्हे मुन्ने बच्चे'। उनके करियर ने तब नयी उड़ान भरी, जब नैयर ने उन्हें 'नया दौर' में मौका दिया, जिसमें उन्होंने वैजयंतीमाला के लिए 'मांग के साथ तुम्हारा' गाया। इस गीत ने उनके लिए उद्योग में कई नए दरवाजे खोल दिए और इसके बाद उन्होंने 'वक्त' एवं 'गुमराह' जैसी फिल्मों के लिए गीतों को अपनी आवाज दी।
दादासाहेब फाल्के और पद्म विभूषण से सम्मानित
आशा भोसले ने कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, अनेक फिल्मफेयर पुरस्कार अपने नाम किए। भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के और पद्म विभूषण से उन्हें सम्मानित किया गया। वैश्विक संगीत इतिहास में संभवतः सबसे लंबे समय तक सक्रिय रहने वाली गायिकाओं में शामिल आशा का निजी जीवन भी उनके पेशेवर जीवन की तरह साहसी फैसलों से भरा रहा।
दोनों बहनों का निधन 92 वर्ष की उम्र में
आशा भोसले ने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। संयोग की बात है कि उनकी बहन लता मंगेशकर का निधन भी 92 वर्ष की उम्र में ही हुआ था।

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